रस-प्रयोग:किस रोग में कौन सा रस लेंगे?

रस-प्रयोग::

किस रोग में कौन सा रस लेंगे?

भूख लगाने के हेतुः प्रातःकाल खाली पेट नींबू का पानी पियें। खाने से पहले अदरक का कचूमर सैंधव 

नमक 

के साथ लें।

रक्तशुद्धिः नींबू, गाजर, गोभी, चुकन्दर, पालक, सेव, तुलसी, नीम और बेल के पत्तों का रस।

दमाः लहसुन, अदरक, तुलसी, चुकन्दर, गोभी, गाजर, मीठी द्राक्ष का रस, भाजी का सूप अथवा मूँग का 

सूप और बकरी का शुद्ध दूध लाभदायक है। घी, तेल, मक्खन वर्जित है।

उच्च रक्तचापः गाजर, अंगूर, मोसम्मी और ज्वारों का रस। मानसिक तथा शारीरिक आराम आवश्यक है।

निम्न रक्तचापः मीठे फलों का रस लें, किन्तु खट्टे फलों का उपयोग न करें। अंगूर और मोसम्मी का रस 

अथवा दूध भी लाभदायक है।

पीलियाः अंगूर, सेव, रसभरी, मोसम्मी। अंगूर की अनुपलब्धि पर लाल मुनक्के तथा किसमिस का पानी। 

गन्ने को चूसकर उसका रस पियें। केले में 1.5 ग्राम चूना लगाकर कुछ समय रखकर फिर खायें।

मुहाँसों के दागः गाजर, तरबूज, प्याज, तुलसी और पालक का रस।

संधिवातः लहसुन, अदरक, गाजर, पालक, ककड़ी, गोभी, हरा धनिया, नारियल का पानी तथा सेव और गेहूँ 

के ज्वारे।

एसीडिटीः गाजर, पालक, ककड़ी, तुलसी का रस, फलों का रस अधिक लें। अंगूर मोसम्मी तथा दूध भी 

लाभदायक है।

कैंसरः गेहूँ के ज्वारे, गाजर और अंगूर का रस।

सुन्दर बनने के लिएः सुबह-दोपहर नारियल का पानी या बबूल का रस लें। नारियल के पानी से चेहरा 

साफ  करें।

फोड़े-फुन्सियाँ- गाजर, पालक, ककड़ी, गोभी और नारियल का रस।

कोलाइटिसः गाजर, पालक और पाइनेपल का रस। 70 प्रतिशत गाजर के रस के साथ अन्य रस समप्राण। 

चुकन्दर, नारियल, ककड़ी, गोभी के रस का मिश्रण भी उपयोगी है।

अल्सरः अंगूर, गाजर, गोभी का रस। केवल दुग्धाहार पर रहना आवश्यक है।

सर्दी-कफः मूली, अदरक, लहसुन, तुलसी, गाजर का रस, मूँग अथवा भाजी का सूप।

ब्रोन्काइटिसः पपीता, गाजर, अदरक, तुलसी, पाइनेपल का रस, मूँग का सूप। स्टार्चवाली खुराक वर्जित।



दाँत निकलते बच्चे के लिएः पाइनेपल का रस थोड़ा नींबू डालकर रोज चार औंस(100-125 ग्राम)।

रक्तवृद्धि के लिएः मोसम्मी, अंगूर, पालक, टमाटर, चुकन्दर, सेव, रसभरी का रस रात को। रात को 

भिगोया हुआ खजूर का पानी सुबह में। इलायची के साथ केले भी उपयोगी हैं।

स्त्रियों को मासिक धर्म कष्टः अंगूर, पाइनेपल तथा रसभरी का रस।



आँखों के तेज के लिएः गाजर का रस तथा हरे धनिया का रस श्रेष्ठ है।

अनिद्राः अंगूर और सेव का रस। पीपरामूल शहद के साथ।

वजन बढ़ाने के लिएः पालक, गाजर, चुकन्दर, नारियल और गोभी के रस का मिश्रण, दूध, दही, सूखा 

मेवा, अंगूर और सेवों का रस। 



डायबिटीजः गोभी, गाजर, नारियल, करेला और पालक का रस।



पथरीः पत्तों वाली भाजी न लें। ककड़ी का रस श्रेष्ठ है। सेव अथवा गाजर या कद्दू का रस भी सहायक है। जौ 

एवं सहजने का सूप भी लाभदायक है।



सिरदर्दः ककड़ी, चुकन्दर, गाजर, गोभी और नारियल के रस का मिश्रण।



किडनी का दर्दः गाजर, पालक, ककड़ी, अदरक और नारियल का रस।

फ्लूः अदरक, तुलसी, गाजर का रस।



वजन घटाने के लिएः पाइनेपल, गोभी, तरबूज का रस, नींबू का रस।



पायरियाः गेहूँ के ज्वारे, गाजर, नारियल, ककड़ी, पालक और सुआ की भाजी का रस। कच्चा अधिक 

खायें।



बवासीरः मूली का रस, अदरक का रस घी डालकर।



डिब्बेपैक फलों के रस से बचोः

बंद डिब्बों का रस भूलकर भी उपयोग में न लें। उसमें बेन्जोइक एसिड होता है। यह एसिड तनिक भी 

कोमल चमड़ी का स्पर्श करे तो फफोले पड़ जाते हैं। और उसमें उपयोग में लाया जानेवाला सोडियम 

बेन्जोइक नामक रसायन यदि कुत्ता भी दो ग्राम के लगभग खा ले तो तत्काल मृत्यु को प्राप्त हो जाता है। 

उपरोक्त रसायन फलों के रस, कन्फेक्शनरी, अमरूद, जेली, अचार आदि में प्रयुक्त होते हैं। उनका उपयोग 

मेहमानों के सत्कारार्थ या बच्चों को प्रसन्न करने के लिए कभी भूलकर भी न करें।

‘फ्रेशफ्रूट’ के लेबल में मिलती किसी भी बोतल या डिब्बे में ताजे फल अथवा उनका रस कभी नहीं होता। 


बाजार में बिकता ताजा ‘ओरेन्ज’ कभी भी संतरा-नारंगी का रस नहीं होता। उसमें चीनी, सैक्रीन और कृत्रिम 

रंग ही प्रयुक्त होते हैं जो आपके दाँतों और आँतड़ियों को हानि पहुँचा कर अंत में कैंसर को जन्म देते हैं। बंद 

डिब्बों में निहित फल या रस जो आप पीते हैं उन पर जो अत्याचार होते हैं वे जानने योग्य हैं। सर्वप्रथम तो 

बेचारे फल को उफनते गरम पानी में धोया जाता है। फिर पकाया जाता है। ऊपर का छिलका निकाल लिया 

जाता है। इसमें चाशनी डाली जाती है और रस ताजा रहे इसके लिए उसमें विविध रसायन (कैमीकल्स) डाले 

जाते हैं। उसमें कैल्शियम नाइट्रेट, एलम और मैग्नेशियम क्लोराइड उडेला जाता है जिसके कारण अँतड़ियों 

में छेद हो जाते हैं, किडनी को हानि पहुँचती है, मसूढ़े सूज जाते हैं। जो लोग पुलाव के लिए बाजार के बंद 

डिब्बों के मटर उपयोग में लेते हैं उन्हें हरे और ताजा रखने के लिए उनमें मैग्नेशियम क्लोराइड डाला जाता 

है। मक्की के दानों को ताजा रखने के लिए सल्फर डायोक्साइड नामक विषैला रसायन (कैमीकल) डाला 

जाता है। एरीथ्रोसिन नामक रसायन कोकटेल में प्रयुक्त होता है। टमाटर के रस में नाइट्रेटस डाला जाता है। 

शाकभाजी के डिब्बों को बंद करते समय शाकभाजी के फलों में जो नमक डाला जाता है वह साधारण नमक 

से 45 गुना अधिक हानिकारक होता है।

इसलिए अपने और बच्चों के स्वास्थ्य के लिए और मेहमान-नवाजी के फैशन के लिए भी ऐसे बंद डिब्बों 

की शाकभाजी का उपयोग करके स्वास्थ्य को स्थायी जोखिम में न डालें।

संस्कृति – सनातन धर्म के अनुसार भोजन ग्रहण करने के कुछ नियम है



भोजन सम्बन्धी कुछ नियम

१ पांच अंगो ( दो हाथ , २ पैर , मुख ) को अच्छी तरह से धो कर ही भोजन करे !

२. गीले पैरों खाने से आयु में वृद्धि होती है !

३. प्रातः और सायं ही भोजन का विधान है !

४. पूर्व और उत्तर दिशा की ओर मुह करके ही खाना चाहिए !

५. दक्षिण दिशा की ओर किया हुआ भोजन प्रेत को प्राप्त होता है !

६ . पश्चिम दिशा की ओर किया हुआ भोजन खाने से रोग की वृद्धि होती है !

७. शैय्या पर , हाथ पर रख कर , टूटे फूटे वर्तनो में भोजन नहीं करना चाहिए !

८. मल मूत्र का वेग होने पर , कलह के माहौल में , अधिक शोर में , पीपल , वट वृक्ष के नीचे , भोजन नहीं 

करना चाहिए !

९ परोसे हुए भोजन की कभी निंदा नहीं करनी चाहिए !

१०. खाने से पूर्व अन्न देवता , अन्नपूर्णा माता की स्तुति कर के , उनका धन्यवाद देते हुए , तथा सभी 

भूखो को भोजन प्राप्त हो इस्वर से ऐसी प्राथना करके भोजन करना चाहिए !

११. भोजन बनने वाला स्नान करके ही शुद्ध मन से , मंत्र जप करते हुए ही रसोई में भोजन बनाये और 

सबसे पहले ३ रोटिया अलग निकाल कर ( गाय , कुत्ता , और कौवे हेतु ) फिर अग्नि देव का भोग लगा कर 

ही घर वालो को खिलाये !

१२. इर्षा , भय , क्रोध , लोभ , रोग , दीन भाव , द्वेष भाव , के साथ किया हुआ भोजन कभी पचता नहीं है !

१३. आधा खाया हुआ फल , मिठाईया आदि पुनः नहीं खानी चाहिए !

१४. खाना छोड़ कर उठ जाने पर दुबारा भोजन नहीं करना चाहिए !

१५. भोजन के समय मौन रहे !

१६. भोजन को बहुत चबा चबा कर खाए !

१७. रात्री में भरपेट न खाए !

१८. गृहस्थ को ३२ ग्रास से ज्यादा न खाना चाहिए !

१९. सबसे पहले मीठा , फिर नमकीन , अंत में कडुवा खाना चाहिए !

२०. सबसे पहले रस दार , बीच में गरिस्थ , अंत में द्राव्य पदार्थ ग्रहण करे !

२१. थोडा खाने वाले को –आरोग्य , आयु , बल , सुख, सुन्दर संतान , और सौंदर्य प्राप्त होता है !

२२. जिसने ढिढोरा पीट कर खिलाया हो वहा कभी न खाए !

२३. कुत्ते का छुवा , रजस्वला स्त्री का परोसा , श्राध का निकाला , बासी , मुह से फूक मरकर ठंडा किया , 

बाल गिरा हुवा भोजन , अनादर युक्त , अवहेलना पूर्ण परोसा गया भोजन कभी न करे !

२४. कंजूस का , राजा का , वेश्या के हाथ का , शराब बेचने वाले का दिया भोजन कभी नहीं करना चाहिए !

इलाज – अंग का सड़ जाना



कुछ चोट लग जाती है, और कुछ छोटे बहुत गंभीर हो जाती है। जैसे 

कोई डाईबेटिक पेशेंट है चोट लग गयी तो उसका सारा दुनिया जहां एक 

ही जगह है, क्योंकि जल्दी ठीक ही नही होता है। और उसके लिए 

कितना भी चेष्टा करे करे डॉक्टर हर बार उसको सफलता नही मिलता 

है। और अंत में वो चोट धीरे धीरे गैंग्रीन (अंग का सड़ जाना) में कन्वर्ट 

हो जाती है। और फिर काटना पड़ता है, उतने हिस्से को शारीर से 

निकालना पड़ता है। ऐसी परिस्तिथि में एक औषधि है जो गैंग्रीन को भी 

ठीक करती है और Osteomyelitis (अस्थिमज्जा का प्रदाह) को भी 

ठीक करती है।

गैंग्रीन माने अंग का सड़ जाना, जहाँ पे नए कोशिका विकसित नही 

होते। न तो मांस में और न ही हड्डी में और सब पुराने कोशिका मरते 

चले जाते हैं। इसीका एक छोटा भाई है Osteomyelitis इसमें भी 

कोशिका कभी पुनर्जीवित नही होते, जिस हिस्से में होता है उहाँ बहुत 

बड़ा घाव हो जाता है और वो ऐसा सड़ता है के डॉक्टर कहता है की 

इसको काट के ही निकलना है और कोई दूसरा उपाय नही है।। ऐसे 

परिस्तिथि में जहां शारीर का कोई अंग काटना पड़ जाता हो या पड़ने की 

संभावना हो, घाव बहुत हो गया हो उसके लिए आप एक औषधि अपने 

घर में तैयार कर सकते है।

औषधि है देशी गाय का मूत्र (सूती के आट परत कपड़ो में चन कर) , 

हल्दी और गेंदे का फुल। गेंदे के फुल की पिला या नारंगी पंखरियाँ 

निकलना है, फिर उसमे हल्दी डालके गाय मूत्र डालके उसकी चटनी 

बनानी है। अब चोट कितना बड़ा है उसकी साइज़ के हिसाब से गेंदे के 

फुल की संख्या तै होगी, माने चोट छोटे एरिया में है तो एक फुल, बड़े है 

तो दो, तिन, चार अंदाज़े से लेना है। इसकी चटनी बनाके इस चटनी को 

लगाना है जहाँ पर भी बाहर से खुली हुई चोट है जिससे खून निकल 

जुका है और ठीक नही हो रहा। कितनी भी दावा खा रहे है पर ठीक नही 

हो रहा, ठीक न होने का एक कारण तो है डाईबेटिस दूसरा कोई जिनगत 

कारण भी हो सकते है। इसको दिन में कम से कम दो बार लगाना है 

जैसे सुबह लगाके उसके ऊपर रुई पट्टी बांध दीजिये ताकि उसका असर 

बॉडी पे रहे; और शाम को जब दुबारा लगायेंगे तो पहले वाला धोना 

पड़ेगा टी इसको गोमूत्र से ही धोना है डेटोल जैसो का प्रयोग मत करिए, 

गाय के मूत्र को डेटोल की तरह प्रयोग करे। धोने के बाद फिर से चटनी 

लगा दे। फिर अगले दिन सुबह कर दीजिये।

यह इतना प्रभावशाली है के आप सोच नही सकते देखेंगे तो चमत्कार 

जैसा लगेगा। इस औषधि को हमेशा ताजा बनाके लगाना है। किसीका 

भी जखम किसी भी औषधि से ठीक नही हो रहा है तो ये लगाइए। जो 

सोराइसिस गिला है जिसमे खून भी निकलता है, पस भी निकलता है 

उसको यह औषधि पूर्णरूप से ठीक कर देता है। अकसर यह एक्सीडेंट के 

केसेस में खूब प्रोयोग होता है क्योंकि ये लगाते ही खून बांध हो जाता है। 

ऑपरेशन का कोई भी घाव के लिए भी यह सबसे अच्छा औषधि है। 

गिला एक्जीमा में यह औषधि बहुत काम करता है, जले हुए जखम में 

भी काम करता है।

संस्कृति-Why 108 time Mantra Chanting Compulsory? 108 बार मंत्र जाप क्यूँ ?

     The Wholeness in Number”9″ and Power in Number “7”

 Why is the use of 108 time of Mantra? 

  • There are 12 zodiac signs and 9 planets. As the 9 planets move through the 12 signs, their positions affect us either negatively or positively. Chanting the Om Namah Shivaya 108 times (12 x 9 = 108 duh!), nullifies any negative effects and enhances positive effects of the planets on us! 

  • Here are 54 letters in Sanskrit alphabets and Each has masculine and feminine, i.e. shiva and shakti 54 * 2 = 108
  • Time: Some say there are 108 feelings, with 36 related to the past, 36 related to the present, and 36 related to the future.
  • Astrology: There are 12 constellations, and 9 arc segments called namshas or chandrakalas. 9 times 12 equals 108. Chandra is moon, and kalas are the divisions within a whole
  • The diameter of the sun is 108 times the diameter of the Earth.
  • 108 represents (1+0+8) = 9, where 9 represents 9 tattvas
  • Nine Tattvas (Principles):
————————–
1. Jiva – soul or living being (Consciousness)
2. Ajiva – non-living substances
3. Asrava – cause of the influx of karma
4. Bandh – bondage of karma
5. Punya – virtue
6. Paap – sin
7. Samvara – arrest of the influx of karma
8. Nirjara – exhaustion of the accumulated karma
9. Moksha – total liberation from karma
Again 9 tattvas and 12 months ,multiplication leads to (12 * 9 ) = 108.

  • Followers use 108 beads in their malas. They implement the following formula:

6 x 3 x 2 x3 = 108
6 senses [sight, sound, smell, taste, touch, thought]
3 aspects of time [past, present, future]
2 condition of heart [pure or impure]
3 possibilties of sentiment [like, dislike, indifference]


  • Mathematically speaking number 9 stands between 0-8 (i.e. 0 to 8 , total numbers are 9). Eight represents completeness or totality because it includes the 4 cardinal directions and the 4 ordinal directions
Zero, by contrast, represents nothingness or emptiness. It is geometrically represented by a plain sheet with no marks on it. Thus 8 is everything and 0 is nothing. 9 is the threshold number between 8 and 0. The number 1 which follows 0 represents the beginning , the root of all geometrical patterns, while 8 is the number represents fulfillment or end.

So number 108 represents beginning- nothingness- fulfillment. i.e. nothingness between the beginning and the end. Or we can say 1 stands for beginning and 8 stands for infinity and eternity.

  • Mahabharat have 18पर्व (PARV)Chapters. It Mean = 1+8 = 9 Completeness.
  • Mehmood Gaznavi attached 17 Times and next he Taken “Shayamantaka”. It mean 17+1=18(1+8=9)
  • Shakuni Rolled the dice the 17th Time and said ” Lo i have won”. it means on Next rolled Pandavas are on the Road. The completeness.     


                        The power of Number ” 7 “

  • RAMAYAN have “7” कांड. 
  • Krishna’s Dwarika consist of 7 Islands(द्वीप )-
1. Shankhodhara         4.Dwarka                         7.Harshad & Prabhas
2.Aramda                   5.Purvadvra 
3.Rupen                     6.Okhamadhi

  • One could Split Light into 7 “Colors” and One Could combine the Seven Colors in One Light.
1.Red               4.Green         7.Violet
2.Orange          5.Blue
3.Yellow          6.Indigo

  • According to “YOG”Vidya – 7 “Chakras” in our Body.
1.Crown        4.Heart         7.Root
2.Brow          5.Solar
3.Throat        6.Spleen

  • India Classic Music – 7 “swar” स्वर 
1. Sa                              4.  Ma                           7. Ni
2. Re                              5.  Pa
3. Ga                              6.  Dha

  • In English 7 “SWAR” – 1.DO 
  •                                   2.RE 
  •                                   3.MI 
  •                                   4.FA 
  •                                   5.SOL 
  •                                   6.LA 
  •                                   7.TI 

  • If you play all Swar at same moment your will get OUTPUT of Sound ” OM”.
  • Broad form of Energy- 
1. Mechanical                      4.Radiant                          7.Nuclear
2.Heat                                 5.Electrical
3. Chemical                         6.Sound

  •  Seven Rivers called “सप्तसिंधु “.
  • Seven Sages   called ” सप्त ऋषि 
  • Vedic Calenders have ” 7″ Days Phase.
  • विवाह में 7  फेरे 

.The Sixteen Purifications (1+6=7)  १ ६ संस्कार  ( १+६ =७ )
These are as listed below: 
Garbhaadhaana: The first coming together of the husband & wife for bringing about conception. 
Pumsvana: Ceremony performed when the first signs of conception are seen, and is to be performed when someone desires a male child.
 Seemantonayana: A ceremony of parting of the hairs of the expectant mother to keep her spirits high & positive. Special music is arranged for her.
 Jaatakarma: After the birth of the child, the child is given a secret name, he is given taste of honey & ghee, mother starts the first breast-feeding after chanting of a mantra.
 Naama-karana: In this ceremony the child is given a formal name. Performed on the 11th day.
 Nishkramana: In this the formal darshan of sun & moon is done for the child. 
Annapraashana: This ceremony is performed, when the child is given solid food (anna) for the first time. Chudaakarana: Cuda means the ‘lock or tuft of hair’ kept after the remaining part is shaved off.
 Karna-vedha: Done in 7th or 8th month. Piercing of the ears. 
Upanayan: The thread ceremony. The child is thereafter authorized to perform all rituals. 
Vedaarambha: Studies of Vedas begins with the guru [teacher]. 
Samaavartan: Convocation and returning home. 
Vivaaha: Marriage ceremony. 
Vaanprastha: As old age approaches, the person retires for a life of tapas (austerity) & studies.
 Sanyaasa: Before leaving the body, a Hinddu sheds all sense of responsibility & relationships to awake & revel in the timeless truth.
 Antyeshti: The last rites done after the death.
Of these, the first three are pre-natal samskaaras;
 the next six pertain to childhood; 
the subsequent three are for boyhood; marriage,
 the thirteenth pertains to youth and manhood;
 the next two are for later age and the sixteenth is the last of samkaaras for a man. 
Antyesti is the last samskaara and other rituals like annual shraaddha etc are not requisites of Sanatana Dharma, but are later incorporations into Hinduism…..

 16 श्रंगार और उनके महत्तव ( १+६ =७ )

1) बिन्दी – सुहागिन स्त्रियां कुमकुम या सिन्दुर से अपने ललाट पर लाल बिन्दी जरूर लगाती है और इसे परिवार की समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।

2) -सिन्दुर – सिन्दुर को स्त्रियों का सुहाग चिन्ह माना जाता है। विवाह के अवसर पर पति अपनी पत्नि की मांग में सिंन्दुर भर कर जीवन भर उसका साथ निभाने का वचन देता है।

-नथ – विवाह के अवसर पर पवित्र अग्नि के चारों ओर सात फेरे लेने के बाद में देवी पार्वती के सम्मान में नववधू को नथ पहनाई जाती है।

9) -कर्ण फूल – कान में जाने वाला यह आभूषण कई तरह की सुन्दर आकृतियों में होता है, जिसे चेन के सहारे जुड़े में बांधा जाता है।

10) -हार – गले में पहना जाने वाला सोने या मोतियों का हार पति के प्रति सुहागन स्त्री के वचनबध्दता का प्रतीक माना जाता है। वधू के गले में वर व्दारा मंगलसूत्र से उसके विवाहित होने का संकेत मिलता है।

11) -बाजूबन्द – कड़े के समान आकृति वाला यह आभूषण सोने या चान्दी का होता है। यह बांहो में पूरी तरह कसा रहता है, इसी कारण इसे बाजूबन्द कहा जाता है।

12) -कंगण और चूडिय़ाँ – हिन्दू परिवारों में सदियों से यह परम्परा चली आ रही है कि सास अपनी
बडी़ बहू को मुंह दिखाई रस्म में सुखी और सौभाग्यवती बने रहने के आशीर्वाद के साथ वही कंगण देती है, जो पहली बार ससुराल आने पर उसकी सास ने दिए थे। पारम्परिक रूप से ऐसा माना जाता है कि सुहागिन स्त्रियों की कलाइयां चूडिय़ों से भरी रहनी चाहिए।

-13) अंगूठी – शादी के पहले सगाई की रस्म में वर-वधू द्वारा एक-दूसरे को अंगूठी पहनाने की परम्परा बहुत पूरानी है। अंगूठी को सदियों से पति-पत्नी के आपसी प्यार और विश्वास का प्रतीक माना जाता रहा है।

14) -कमरबन्द – कमरबन्द कमर में पहना जाने वाला आभूषण है, जिसे स्त्रियां विवाह के बाद पहनती है। इससे उनकी छरहरी काया और भी आकर्षक दिखाई देती है। कमरबन्द इस बात का प्रतीक कि नववधू अब अपने नए घर की स्वामिनी है। कमरबन्द में प्राय: औरतें चाबियों का गुच्छा लटका कर रखती है।

15) -बिछुआ – पैरें के अंगूठे में रिंग की तरह पहने जाने वाले इस आभूषण को अरसी या अंगूठा कहा जाता है। पारम्परिक रूप से पहने जाने वाले इस आभूषण के अलावा स्त्रियां कनिष्का को छोडकर तीनों अंगूलियों में बिछुआ पहनती है।

16) -पायल- पैरों में पहने जाने वाले इस आभूषण के घुंघरूओं की सुमधुर ध्वनि से घर के हर सदस्य को नववधू की आहट का संकेत मिलता है।

Question ? 

Why do we use the Word “OM”ओउम  ?
Because in English too…

OMNISCIENCE –  Infinite Knowledge
OMNIPOTENT – Person have Infinite Power
OMNIVOROUS – Ability to absorb everything
OMEN              – Implying a predictive Sign of Future Event
OMBUDSMAN – Trusted intermediary between parties, with authority to awards a verdict.
AMEN              – In christianity
AMIN               – In Islamic 


वन्देमातरम



संस्कृति – Story – 99CLUB



Once upon a time, there lived a King who, despite his luxurious lifestyle, was neither happy nor content.

One day, the King came upon a servant who was singing happily while he worked. This fascinated the King; why was he, the Supreme Ruler of the Land, unhappy and gloomy, while a lowly servant had so much joy.

The King asked the servant, ‘Why are you so happy?’

The man replied, ‘Your Majesty, I am nothing but a servant, but my family and I don’t need too much – just a roof over our heads and warm food to fill our tummies.’

The king was not satisfied with that reply. Later in the day, he sought the advice of his most trusted advisor. After hearing the King’s woes and the servant’s story, the advisor said, ‘Your Majesty, I believe that the servant Has not been made part of The 99 Club.’

‘The 99 Club? And what exactly is that?’ the King inquired.

The advisor replied, ‘Your Majesty, to truly know what The 99 Club is, place 99 Gold coins in a bag and leave it at this servant’s doorstep.’

When the servant saw the bag, he took it into his house. When he opened the bag, he let out a great shout of joy… So many gold coins!

He began to count them. After several counts, he was at last convinced that there were 99 coins. He wondered, ‘What could’ve happened to that last gold coin? Surely, no one would leave 99 coins!’

He looked everywhere he could, but that final coin was elusive. Finally, exhausted he decided that he was going to have to work harder than ever to earn that gold coin and complete his collection.

From that day, the servant’s life was changed. He was overworked, horribly grumpy, and castigated his family for not helping him make that 100th gold coin. He stopped singing while he worked.

Witnessing this drastic transformation, the King was puzzled. When he sought his advisor’s help, the advisor said, ‘Your Majesty, the servant has now officially joined The 99 Club.’

He continued, ‘The 99 Club is a name given to those people who have enough to be happy but are never contented, because they’re always yearning and Striving for that extra 1, saying to themselves: ‘Let me get that one final thing and then I will be happy for life.’ We can be happy, even with very little in our lives, but the minute we’re given something bigger and better, we want even more! We lose our sleep, our happiness, we hurt the people around us; all these as a price for our growing needs and desires.

That’s the “Club 99”