इलाज़ – डायबिटीज (DIABETES)

डायाबिटीस ( Diabetes )

भारत में करीब 5 Crore लोग यह रोग से पीड़ित हे |


रोज सुबह उठकर 5 मिनिट भ्रस्त्रिका,30 मिनिट कपालभाती ,30 मिनिट अनुलोब विलोम का प्राणायाम करे और उसके साथ नीचे बताये इलाज में से

कोई भी एक करे….
लेकिन प्राणायाम सभी इलाज में करना आवश्यक हे |

इलाज :
# 100 Gms. मेथी का दाना + 100 Gms. तेज पत्ता ( जिसे हम गरम मसाले में इस्तेमाल करते हे ) + 150 Gms जामुन के बीज का पावडर +250 Gms बेलपत्र के पत्ते का पावडर ….
ये सब को पत्थर में पीस कर पावडर बना लो |
अब ये पावडर को एक बार सुबह का नाश्ता और एक बार शाम के खाने के एक घंटे
पहले 1-1 चमच गरम पानी के साथ लो |

याद् रखे सुबह और शाम दोनों समय यह दवा ले और खाने के एक घंटे पहले खाये |

और यह दवा के इस्तेमाल के दौरान शक्कर का इस्तेमाल ना करे शक्कर की जगह गुड खा सकते हे |

यह दवा खाने के 2-3 महीने में ही सुगर लेवल से कम हो जायेगा और फिर जब सुगर लेवल से कम हो जाये तो दवा को बंद करदे लेकिन प्राणायाम को चालू रखे
——
# एक चमच मेथी के दाने को रात भर गुनगुने पानी में भिगो कर रखे सुबह उठकर ये पानी पी जाओ और सभी मेथीदाने को चबा चबा कर खा जाओ |

मेथी के पावडर की फंकी कभी मत लो…हमारे यहाँ अक्सर लोग मेथी के दाने की फंकी लेते हे लेकिन यह उतनी असरकारक नहीं हे जितना गुनगुने पानी में भिगाई हुई मेथी को चाबचाबा कर खाना…तो मेथी को रात भर गुनगुने पानी में भिगो कर रखे सुबह उठकर ये पानी पी जाओ और सभी मेथीदाने को चबा चबा कर खा जाओ 

इलाज – Low Blood Pressure

भारत में करीब २० करोड लोग इस बीमारी से पीड़ित हे |

# योग आसन : 


रोज सुबह उठकर 5 मिनिट भ्रस्त्रिका,30 मिनिट कपालभाती ,


30 मिनिट अनुलोब विलोम का प्राणायाम करे और उसके साथ नीचे बताये इलाज में से

कोई भी एक पसंद करे….लेकिन प्राणायाम सभी इलाज में करना आवश्यक हे |

इलाज :

सबसे बेहतर उपाय

# हथेली पर गुड पानी का हल्का लेप करके गाय से चटाए १-२ मिनट से भी कम समय में आपका BP 

नियंत्रित हो जाएगा

===== अन्य बेहतर उपाय =============

१) एक ग्लास पानी में गुड, निम्बू का रस और नमक डालकर तीनों को मिलाकर एक दिन में सुबह और शाम को पीओ |

२) एक कप अनार के रस में आधी चम्मच नमक डालकर पीओ |

३) एक कप अंगूर के रस में आधी चम्मच नमक डालकर पीओ |

४ ) एक ग्लास गाय के दूध में १ चम्मच गाय का घी मिलाकर पिये |

५) मक्खन में गुड या मिशरी मिलाकर खाये |

६ ) गन्ना,संतरे या आम के रस में नमक डालकर पीओ |

७) अगर किसी गरीब के पास इस सभी के पैसे ना हो तो उसको बोलो सिर्फ पानी के एक ग्लास में नमक डालकर घोलकर पीये | 


संस्कृति- TAJ MAHAL OR TEJOMAHALAYA

मैं जब 10 वर्ष का था, उस समय मेरी  हिन्दी पुस्तक में एक पाठ ताजमहल पर था। जिस दिन वह पाठ पढ़ाया जाना था उस दिन कक्षा के सभी बालक अत्यधिक उल्लसित थे। उस पाठ में ताजमहल की भव्यता-शुभ्रता का वर्णन तो था ही, उससे अधिक उससे जुड़े मिथकों का वर्णन जिन्हें हमारे शिक्षक ने अतिरज्जित रूप से बढ़ा दिया था। मेरे बाल मन पर यह बात पूर्णरूप से अंकित हो गई कि यह विश्व प्रसिद्ध ताज मुगल सम्राट्‌ शाहजहाँ ने बनवाया था।

 एक विशेष कार्य से जीवन में पहली बार आगरा आया। वह विशिष्ट कार्य हम दोनों के मन पर इतना अधिक प्रभावी था कि मार्ग में एक बार भी यह ध्यान नहीं आया कि इसी आगरा में विश्व प्रसिद्ध दर्शनीय ताजमहल है। कार्य हो जाने पर जब हम लोग बालूगंज से आगरा किला स्टेशन की ओर लौट रहे थे तो लम्बी ढलान के नीचे चौराहे से जो एकाएक दाहिनी ओरदृष्टि पड़ी तो सूर्य की आभा में ताजमहल हमारे सम्मुख अपनी पूर्ण भव्यता में खड़ा था। हम दोनों कुछ क्षण तो स्तब्ध से खड़े रहे गये, तदुपरान्त किसी साईकिल वाले की घंटी सुनकर ह लोगों को चेत हुआ।

जहाँ पर हम लोग खड़े थे वहाँ पर चारों ओर की सड़कें चढ़ाई पर जाती थीं। ऐसा प्रतीत होता था कि दाहिनी ओर चढ़ाई समाप्त होते ही नीचे मैदान में थोड़ी दूर पर ही ताजमहल है, अतः हम लोग उसी ओर बढ़ लिये। ऊपर पहुँच कर यह तो आभास हुआ कि ताजमहल वहाँ से पर्याप्त दूर है, परन्तु गरीबी के दिन थे, अस्तु हम लोग पैदल ही दो मील से अधिक का मार्ग तय कर गये। उन दिनों ताजमहल दर्शन के लिये टिकट नहीं लेना पड़ता था। और गाइड करने का तो प्रश्न ही नहीं था, परन्तु जिन लोगों ने गाइड किये हुए थे लगभग उनके तसाथ चलते हुए हमने उनकी बबकवास र्पाप्त सुनी जो उस दिन तो अच्छी ही लगी थी।

उस प्रथम दर्शन में ताजमहल मुझे अपनी कल्पना से भी अधिक भव्य तथा सुन्दर लगा था। उसकी चित्रकारी तथा पत्थर पर खुदाई  कटाई का कार्य अद्‌भुत था, फिर भी मुझे एक दो बातें कचौट गई थीं। बुर्जियों, छतरियों, मेहराबों में स्पष्ट हिन्दू-कला केदर्शन हो रहे थे। मुखय द्वार के ऊपर की बनी बेल तथा कलाकृति उसी दिन मैं कई मकानों के द्वार पर आगरा में ही देख चुका था। मैंने अपने मित्र जी से अपनी शंका प्रकट की तो उन्होंने गाइडों की भाषा में ही शाहजहाँ के हिन्दू प्रिय होने की बात कह कर मेरा समाधान कर दिया, परन्तु मैं पूर्णतया सन्तुष्ट नहीं हुआ एवं मेरे अन्तर्मन में कहीं पर यह सन्देह बहुत काल तक प्रच्छन्न रूप में घुसा रहा।
मेरी जिज्ञासा को प्रोफेसर p.n oak ने शांत किया 

http://en.wikipedia.org/wiki/P._N._Oak

http://tajmahal.gaupal.in/bhumika 

और मेरे पीछे के ब्लॉग मैं आप ताजमहल के बारे मैं विस्तृत विवरण पद सकते हैं ……….



इलाज़ – रामफल से कैंसर का इलाज ( "GRAVIOLA" IT CAN KILL CANCER")





“10000 times stronger killer of CANCER than Chemo”.. do share it.. can save many lives, fill up hopes and build confidence in the patients…

The Sour Sop or the fruit from the graviola tree is a miraculous natural cancer cell killer 10,000 times stronger than Chemo.

www.sun-gazing.com

Why are we not aware of this? Its because some big corporation want to make back their money spent on years of research by trying to make a synthetic version of it for sale.

So, since you know it now you can help a friend in need by letting him know or just drink some sour sop juice yourself as prevention from time to time. The taste is not bad after all. It’s completely natural and definitely has no side effects. If you have the space, plant one in your garden.
The other parts of the tree are also useful.

The next time you have a fruit juice, ask for a sour sop.

How many people died in vain while this billion-dollar drug maker concealed the secret of the miraculous Graviola tree?

This tree is low and is called graviola ! in Brazi l, guanabana in Spanish and has the uninspiring name “soursop” in English. The fruit is very large and the subacid sweet white pulp is eaten out of hand or, more commonly, used to make fruit drinks, sherbets and such.

The principal interest in this plant is because of its strong anti-cancer effects. Although it is effective for a number of medical conditions, it is its anti tumor effect that is of most interest. This plant is a proven cancer remedy for cancers of all types.

Besides being a cancer remedy, graviola is a broad spectrum antimicrobial agent for both bacterial and fungal infections, is effective against internal parasites and worms, lowers high blood pressure and is used for depression, stress and nervous disorders.

If there ever was a single example that makes it dramatically clear why the existence of Health Sciences Institute is so vital to Americans like you, it’s the incredible story behind the Graviola tree..

The truth is stunningly simple: Deep within the Amazon Rainforest grows a tree that could literally revolutionize what you, your doctor, and the rest of the world thinks about cancer treatment and chances of survival. The future has never looked more promising.

Research shows that with extracts from this miraculous tree it now may be possible to:
* Attack cancer safely and effectively with an all-natural therapy that does not cause extreme nausea, weight loss and hair loss
* Protect your immune system and avoid deadly infections
* Feel stronger and healthier throughout the course of the treatment
* Boost your energy and improve your outlook on life

The source of this information is just as stunning: It comes from one of America ‘s largest drug manufacturers, th! e fruit of over 20 laboratory tests conducted since the 1970’s! What those tests revealed was nothing short of mind numbing… Extracts from the tree were shown to:

* Effectively target and kill malignant cells in 12 types of cancer, including colon, breast, prostate, lung and pancreatic cancer..
* The tree compounds proved to be up to 10,000 times stronger in slowing the growth of cancer cells than Adriamycin, a commonly used chemotherapeutic drug!
* What’s more, unlike chemotherapy, the compound extracted from the Graviola tree selectivelyhunts
down and kills only cancer cells.. It does not harm healthy cells!

The amazing anti-cancer properties of the Graviola tree have been extensively researched–so why haven’t you heard anything about it? If Graviola extract is

One of America ‘s biggest billion-dollar drug makers began a search for a cancer cure and their research centered on Graviola, a legendary healing tree from the Amazon Rainforest.

Various parts of the Graviola tree–including the bark, leaves, roots, fruit and fruit-seeds–have been used for centuries by medicine men and native Indi! ans in S outh America to treat heart disease, asthma, liver problems and arthritis. Going on very little documented scientific evidence, the company poured money and resources into testing the tree’s anti-cancerous properties–and were shocked by the results. Graviola proved itself to be a cancer-killing dynamo.
But that’s where the Graviola story nearly ended.

The company had one huge problem with the Graviola tree–it’s completely natural, and so, under federal law, not patentable. There’s no way to make serious profits from it.

It turns out the drug company invested nearly seven years trying to synthesize two of the Graviola tree’s most powerful anti-cancer ingredients. If they could isolate and produce man-made clones of what makes the Graviola so potent, they’d be able to patent it and make their money back. Alas, they hit a brick wall. The original simply could not be replicated. There was no way the company could protect its profits–or even make back the millions it poured into research.

As the dream of huge profits evaporated, their testing on Graviola came to a screeching halt. Even worse, the company shelved the entire project and chose not to publish the findings of its research!

Luckily, however, there was one scientist from the Graviola research team whose conscience wouldn’t let him see such atrocity committed. Risking his career, he contacted a company that’s dedicated to harvesting medical plants from the Amazon Rainforest and blew the whistle.

Miracle unleashed
When researchers at the Health Sciences Institute were alerted to the news of Graviola,! they be gan tracking the research done on the cancer-killing tree. Evidence of the astounding effectiveness of Graviola–and its shocking cover-up–came in fast and furious….

….The National Cancer Institute performed the first scientific research in 1976. The results showed that Graviola’s “leaves and stems were found effective in attacking and destroying malignant cells.” Inexplicably, the results were published in an internal report and never released to the public…

….Since 1976, Graviola has proven to be an immensely potent cancer killer in 20 independent laboratory tests, yet no double-blind clinical trials–the typical benchmark mainstream doctors and journals use to judge a treatment’s value–were ever initiated….

….A study published in the Journal of Natural Products, following a recent study conducted at Catholic University of South Korea stated that one chemical in Graviola was found to selectively kill colon cancer cells at “10,000 times the potency of (the commonly used chemotherapy drug) Adriamycin…”

….The most significant part of the Catholic University of South Korea report is that Graviola was shown to selectively target the cancer cells, leaving healthy cells untouched. Unlike chemotherapy, which indiscriminately targets all actively reproducing cells (such as stomach and hair cells), causing the often devastating side effects of nausea and hair loss in cancer patients.

…A study at Purdue University recently found that leaves from the Graviola tree killed cancer cells among six human cell lines and were especially effective against prostate, pancreatic and lung cancers Seven years of silence broken–it’s finally here

इलाज – सांप के काटने का




दोस्तो सबसे पहले साँपो के बारे मे एक महत्वपूर्ण बात आप ये जान लीजिये ! कि अपने देश भारत मे 550 

किस्म के साँप है ! जैसे एक


cobra है ,viper है ,karit है ! ऐसी 550 किस्म की साँपो की जातियाँ हैं ! इनमे से मुश्किल से 10 साँप है 

जो जहरीले है सिर्फ 10 ! बाकी सब non

poisonous है! इसका मतलब ये हुआ 540 साँप ऐसे है जिनके काटने से आपको कुछ नहीं होगा !!

बिलकुल चिंता मत करिए !

लेकिन साँप के काटने का डर इतना है (हाय साँप ने काट लिया ) और कि कई बार आदमी heart attack से 

मर जाता है !जहर से

नहीं मरता cardiac arrest से मर जाता है ! तो डर इतना है मन मे ! तो ये डर निकलना चाहिए !

वो डर कैसे निकलेगा ????

जब आपको ये पता होगा कि 550 तरह के साँप है उनमे से सिर्फ 10 साँप जहरीले हैं ! जिनके काटने से 

कोई मरता है ! इनमे से जो सबसे जहरीला साँप

है उसका नाम है ! russell viper ! उसके बाद है karit इसके बाद है viper और एक है cobra ! king cobra 

जिसको आप कहते है काला नाग !! ये 4 तो बहुत

ही खतरनाक और जहरीले है इनमे से किसी ने काट लिया तो 99 % chances है कि death होगी !

लेकिन अगर आप थोड़ी होशियारी दिखाये तो आप रोगी को बचा सकते हैं होशियारी क्या दिखनी है ???

आपने देखा होगा साँप जब भी काटता है तो उसके दो दाँत है जिनमे जहर है जो शरीर के मास के अंदर घुस 

जाते हैं ! और खून मे वो अपना जहर छोड़ देता है ! तो फिर ये जहर ऊपर की तरफ जाता है ! मान लीजिये 

हाथ पर साँप ने काट लिया तो फिर जहर दिल की तरफ जाएगा उसके बाद पूरे शरीर मे पहुंचेगा ! ऐसे

ही अगर पैर पर काट लिया तो फिर ऊपर की और heart तक जाएगा और फिर पूरे शरीर मे पहुंचेगा ! कहीं 

भी काटेगा तो दिल तक जाएगा !

और पूरे मे खून मे पूरे शरीर मे उसे पहुँचने मे 3 घंटे लगेंगे !

मतलब ये है कि रोगी 3 घंटे तक तो नहीं ही मरेगा !

जब पूरे दिमाग के एक एक हिस्से मे बाकी सब जगह पर जहर पहुँच जाएगा तभी उसकी death होगी 

otherwise नहीं होगी ! तो 3 घंटे का time

है रोगी को बचाने का और उस तीन घंटे मे अगर आप कुछ कर ले तो बहुत अच्छा है !

क्या कर सकते हैं ?? ???

घर मे कोई पुराना इंजेक्शन (injection) हो तो उसे ले और आगे जहां सुई(needle) लगी होती है वहाँ से 

काटे ! सुई(needle) जिस

पलास्टिक मे फिट होती है उस प्लास्टिक वाले हिस्से को काटे !! जैसे ही आप सुई के पीछे लगे पलास्टिक 

वाले हिस्से को काटेंगे

तो वो injection एक सक्षम पाईप की तरह हो जाएगा ! बिलकुल वैसा ही जैसा होली के दिनो मे बच्चो की 

पिचकारी होती है !

उसके बाद आप रोगी के शरीर पर जहां साँप ने काटा है वो निशान ढूँढे ! बिलकुल आसानी से मिल जाएगा 

क्यूंकि जहां साँप काटता है वहाँ कुछ

सूजन आ जाती है और दो निशान जिन पर हल्का खून लगा होता है आपको मिल जाएँगे ! अब आपको वो 

injection( जिसका सुई

वाला हिस्सा आपने काट दिया है) लेना है और उन दो निशान मे से पहले एक निशान पर रख कर उसको 

खीचना है ! जैसी आप निशान पर

injection रखेंगे वो निशान पर चिपक जाएगा तो उसमे vacuum crate हो जाएगा ! और आप खींचेगे तो 

खून उस injection मे भर

जाएगा ! बिलकुल वैसे ही जैसे बच्चे पिचकारी से पानी भरते हैं ! तो आप इंजेक्शन से खींचते रहिए !और 

आप first time निकलेंगे तो देखेंगे

कि उस खून का रंग हल्का blackish होगा या dark होगा तो समझ लीजिये उसमे जहर मिक्स हो गया है !

तो जब तक वो dark और blackish रंग blood निकलता रहे आप खिंचीये ! तो वो सारा निकल आएगा ! 

क्यूंकि साँप जो काटता है उसमे जहर

ज्यादा नहीं होता है 0.5 मिलीग्राम के आस पास होता है क्यूंकि इससे ज्यादा उसके दाँतो मे रह ही नहीं 

सकता ! तो 0.5 ,0.6 मिलीग्राम है दो तीन

बार मे आपने खीच लिया तो बाहर आ जाएगा !

और जैसे ही बाहर आएगा आप देखेंगे कि रोगी मे कुछ बदलाव आ रहा है थोड़ी consciousness (चेतना) 

आ जाएगी ! साँप काटने से व्यकित

unconsciousness हो जाता है या semi consciousness हो जाता है और जहर को बाहर खींचने से चेतना 

आ जाती है ! consciousness

आ गई तो वो मरेगा नहीं ! तो ये आप उसके लिए first aid (प्राथमिक सहायता) कर सकते हैं ! इसी 

injection को आप बीच से कट कर दीजिये

बिलकुल बीच कट कर दीजिये 50% इधर 50% उधर ! तो आगे का जो छेद है उसका आकार और बढ़ 

जाएगा और खून और जल्दी से उसमे भरेगा !

तो ये आप रोगी के लिए first aid (प्राथमिक सहायता) के लिए ये कर सकते हैं !
____________________________

दूसरा एक medicine आप चाहें तो हमेशा अपने घर मे रख सकते हैं बहुत सस्ती है homeopathy मे आती 

है ! उसका नाम है NAJA (N A J A ) !

homeopathy medicine है, किसी भी homeopathy shop मे आपको मिल जाएगी ! और इसकी 

potency है 200 ! आप

दुकान पर जाकर कहें NAJA 200 देदो !

तो दुकानदार आपको दे देगा ! ये 5 मिलीलीटर आप घर मे खरीद कर रख लीजिएगा 100 लोगो की जान 

इससे बच जाएगी ! और इसकी कीमत सिर्फ पाँच रुपए है ! इसकी बोतल भी आती है 100 मिलीग्राम की 

70 से 80 रुपए की उससे आप कम से कम 10000 लोगो की जान बचा सकते हैं जिनको साँप ने काटा है !

और ये जो medicine है NAJA ये दुनिया के सबसे खतरनाक साँप का ही poison है जिसको कहते है क्रैक 

! इस साँप का poison दुनिया मे सबसे खराब माना जाता है ! इसके बारे मे कहते है अगर इसने किसी को 

काटा तो उसे भगवान ही बचा सकता है ! medicine

भी वहाँ काम नहीं करती उसी का ये poison है लेकिन delusion form मे है तो घबराने की कोई बात नहीं ! 

आयुर्वेद का सिद्धांत आप जानते है

लोहा लोहे को काटता है तो जब जहर चला जाता है शरीर के अंदर तो दूसरे साँप का जहर ही काम आता है !

तो ये NAJA 200 आप घर मे रख लीजिये !अब देनी कैसे है रोगी को वो आप जान लीजिये ! 1 बूंद उसकी 

जीभ पर रखे और 10 मिनट बाद

फिर 1 बूंद रखे और फिर 10 मिनट बाद 1 बूंद रखे !! 3 बार डाल के छोड़ दीजिये !बस इतना काफी है !

और ये दवा रोगी की जिंदगी को हमेशा हमेशा के लिए बचा लेगी ! और साँप काटने के एलोपेथी मे जो 

injection है वो आम अस्तप्तालों मे

नहीं मिल पाते ! डाक्टर आपको कहेगा इस अस्तपाताल मे ले जाओ उसमे ले जाओ आदि आदि !!

और जो ये एलोपेथी वालो के पास injection है इसकी कीमत 10 से 15 हजार रुपए है ! और अगर मिल 

जाएँ तो डाक्टर एक साथ 8 से -10 injection ठोक देता है ! कभी कभी 15 तक ठोक देता है मतलब लाख-

डेड लाख तो आपका एक बार मे साफ !! और यहाँ सिर्फ 10 रुपए की medicine से आप उसकी जान बचा 

सकते हैं !

_____________
तो ये जानकारी आप हमेशा याद रखे पता नहीं कब काम आ जाए हो सकता है आपके ही जीवन मे काम आ 


जाए ! या पड़ोसी के जीवन

मे या किसी रिश्तेदार के काम आ जाए! तो first aid के लिए injection की सुई काटने वाला तरीका और ये 

NAJA 200 hoeopathy

दवा ! 10 – 10 मिनट बाद 1 – 1 बूंद तीन बार रोगी की जान बचा सकती है !!

आपने पूरी post पढ़ी बहुत बहुत धन्यवाद ………..

STORY 22

“When I got home that night as my wife served dinner, I held her hand and said, I’ve got something to tell you. She sat down and ate quietly. Again I observed the hurt in her eyes.

… Suddenly I didn’t know how to open my mouth. But I had to let her know what I was thinking. I want a divorce. I raised the topic calmly. She didn’t seem to be annoyed by my words, instead she asked me softly, why?

I avoided her question. This made her angry. She threw away the chopsticks and shouted at me, you are not a man! That night, we didn’t talk to each other. She was weeping. I knew she wanted to find out what had happened to our marriage. But I could hardly give her a satisfactory answer; she had lost my heart to Jane. I didn’t love her anymore. I just pitied her!

With a deep sense of guilt, I drafted a divorce agreement which stated that she could own our house, our car, and 30% stake of my company. She glanced at it and then tore it into pieces. The woman who had spent ten years of her life with me had become a stranger. I felt sorry for her wasted time, resources and energy but I could not take back what I had said for I loved Jane so dearly. Finally she cried loudly in front of me, which was what I had expected to see. To me her cry was actually a kind of release. The idea of divorce which had obsessed me for several weeks seemed to be firmer and clearer now.

The next day, I came back home very late and found her writing something at the table. I didn’t have supper but went straight to sleep and fell asleep very fast because I was tired after an eventful day with Jane. When I woke up, she was still there at the table writing. I just did not care so I turned over and was asleep again.

In the morning she presented her divorce conditions: she didn’t want anything from me, but needed a month’s notice before the divorce. She requested that in that one month we both struggle to live as normal a life as possible. Her reasons were simple: our son had his exams in a month’s time and she didn’t want to disrupt him with our broken marriage.

This was agreeable to me. But she had something more, she asked me to recall how I had carried her into out bridal room on our wedding day. She requested that every day for the month’s duration I carry her out of our bedroom to the front door ever morning. I thought she was going crazy. Just to make our last days together bearable I accepted her odd request.

I told Jane about my wife’s divorce conditions. . She laughed loudly and thought it was absurd. No matter what tricks she applies, she has to face the divorce, she said scornfully.

My wife and I hadn’t had any body contact since my divorce intention was explicitly expressed. So when I carried her out on the first day, we both appeared clumsy. Our son clapped behind us, daddy is holding mommy in his arms. His words brought me a sense of pain. From the bedroom to the sitting room, then to the door, I walked over ten meters with her in my arms. She closed her eyes and said softly; don’t tell our son about the divorce. I nodded, feeling somewhat upset. I put her down outside the door. She went to wait for the bus to work. I drove alone to the office.

On the second day, both of us acted much more easily. She leaned on my chest. I could smell the fragrance of her blouse. I realized that I hadn’t looked at this woman carefully for a long time. I realized she was not young any more. There were fine wrinkles on her face, her hair was graying! Our marriage had taken its toll on her. For a minute I wondered what I had done to her.

On the fourth day, when I lifted her up, I felt a sense of intimacy returning. This was the woman who had given ten years of her life to me. On the fifth and sixth day, I realized that our sense of intimacy was growing again. I didn’t tell Jane about this. It became easier to carry her as the month slipped by. Perhaps the everyday workout made me stronger.

She was choosing what to wear one morning. She tried on quite a few dresses but could not find a suitable one. Then she sighed, all my dresses have grown bigger. I suddenly realized that she had grown so thin, that was the reason why I could carry her more easily.

Suddenly it hit me… she had buried so much pain and bitterness in her heart. Subconsciously I reached out and touched her head.

Our son came in at the moment and said, Dad, it’s time to carry mom out. To him, seeing his father carrying his mother out had become an essential part of his life. My wife gestured to our son to come closer and hugged him tightly. I turned my face away because I was afraid I might change my mind at this last minute. I then held her in my arms, walking from the bedroom, through the sitting room, to the hallway. Her hand surrounded my neck softly and naturally. I held her body tightly; it was just like our wedding day.

But her much lighter weight made me sad. On the last day, when I held her in my arms I could hardly move a step. Our son had gone to school. I held her tightly and said, I hadn’t noticed that our life lacked intimacy. I drove to office…. jumped out of the car swiftly without locking the door. I was afraid any delay would make me change my mind…I walked upstairs. Jane opened the door and I said to her, Sorry, Jane, I do not want the divorce anymore.

She looked at me, astonished, and then touched my forehead. Do you have a fever? She said. I moved her hand off my head. Sorry, Jane, I said, I won’t divorce. My marriage life was boring probably because she and I didn’t value the details of our lives, not because we didn’t love each other anymore. Now I realize that since I carried her into my home on our wedding day I am supposed to hold her until death do us apart. Jane seemed to suddenly wake up. She gave me a loud slap and then slammed the door and burst into tears. I walked downstairs and drove away. At the floral shop on the way, I ordered a bouquet of flowers for my wife. The salesgirl asked me what to write on the card. I smiled and wrote, I’ll carry you out every morning until death do us apart.

That evening I arrived home, flowers in my hands, a smile on my face, I run up stairs, only to find my wife in the bed -dead. My wife had been fighting CANCER for months and I was so busy with Jane to even notice. She knew that she would die soon and she wanted to save me from the whatever negative reaction from our son, in case we push through with the divorce.— At least, in the eyes of our son—- I’m a loving husband….

The small details of your lives are what really matter in a relationship. It is not the mansion, the car, property, the money in the bank. These create an environment conducive for happiness but cannot give happiness in themselves.

So find time to be your spouse’s friend and do those little things for each other that build intimacy. Do have a real happy marriage!
If you don’t share this, nothing will happen to you.

If you do, you just might save a marriage. Many of life’s failures are people who did not realize how close they were to success when they gave up…