संस्कृति – गुरुकुल छात्रावास – Gurukul Hostel

एक विद्दयालय के छात्रावास में एक कक्षा के सभी छात्रों को एक कमरे में रखने का प्रावधान था। वह छात्रावास ग्राम में स्थित था , वहाँ सूर्योदय के पश्चात बिजली चली जाती थी , जैसा कि होता है गुरुकुल आर्थिक रूप से समृद्ध नहीं थी और ना ही वहाँ के छा…त्र ! इस कारण बिजली का कोई और विकल्प नहीं था , वहाँ सूर्योदय के बाद लालटैन जलाकर पढा करते थे । एक कक्षा के सभी छात्र आपस में लडा करते थे और रात को सभी अपनी अपनी लालटैन जला कर पढा करते थे इस कारण से ५-१० दिन में उनका मिट्टी का तेल समाप्त हो जाता था या वे उसे प्रतिदिन थोडी थोडी मात्रा में प्रयोग किया करते थे जिससे वे प्रतिदिन आधे से एक घँटा ही पढ पाते थे । जिसके कारण वे गुरुकुल में पिछडते जा रहे थे एक दिन गुरुकुल के एक अध्यापक ने इस समस्या को समझा व सभी छात्रों को समझाया कि इस प्रकार से लडने के कारण आप लोग अपना ही भविष्य का पतन कर रहे हैं एक छात्र को छोड सभी छात्रों के बात समझ में आयी उन्होंने लडना बंद किया व अपने थोडे थोडे मिट्टी के तेल को एकत्र कर प्रतिदिन एक लालटैन में डाल देते थे जिसके कारण प्रतिदिन लालटैन भी अधिक देर तक जलती व महीने के अंत तक जलती रहती थी व सभी छात्र गोल घेरा बनाकर अधिक देर तक पढ पाते थे व जिस छात्र ने अध्यापक की बात नहीं मानी वह अकेला अपनी लालटैन में पढता रहा अतः वह अधिक देर तक नहीं पढ पाया

व कक्षा के सत्र के अंत में जब परीक्षा का परिणाम आया तब सभी छात्र के बहुत ही अच्छे अंक आये क्यूँकि एक तो उन्होंने एक साथ बैठकर पढाई करी थी जिससे कोइ छात्र गणित में कमजोर था व विज्ञान में अच्छा तो दूसरा छात्र ने जो गणित में तो अच्छा था परंतु विज्ञान में कमजोर तो दोंनों ने एक दूसरे को पढा दिया इस प्रकार हर छात्र ने एक दूसरे की सहायता करी

कक्षा में मात्र एक छात्र असफल रहा जो सभी से अलग रहा अब वह पछता रहा था परंतु अब वह उसी कक्षा में रह गया था और बाकी छात्र अगली कक्षा में चले गये थे और अब उनसे माफी माँगने से भी वह परीक्षा में सफल नहीं हो सकता था

इस कहानी से हमें दो सबक मिलते हैं

एकता में बल व बाद में पछताने से बीता समय वापिस नहीं आता

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