कुछ महाझूठ ! व्यापार और लुट के लिए – स्वास्थ्य से खिलवाड़

वह कहते है ना की सोये हुए को उठाना आसान है लेकिन जिसने सोने का ढोंग किया हो उसे उठाना मुश्किल है, हमारे आसपास कितने षडयंत्रो से भरी दुनिया है उसमे से कुछ षड्यंत्र आपके सामने प्रस्तुत है

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महाझूठ – रिफाइंग तेल स्वास्थ्य-प्रद है

सत्य – पाम, सोयाबीन, सूर्यमुखी, कुसुम, कपास, चावल की भूसी आदि के तेल बेस्वाद व दुर्गंध से भरे होते है उन्हें इससे मुक्त करने के लिए रिफ़ाइन करने की प्रक्रिया का आविष्कार हुआ, “क्या आप जानते है रिफ़ाइन करने के लिए प्रयुक्त रसायन (कास्टिक सोडा, हेकजेन, फुलर आर्क, प्लास्टर ऑफ पेरिस आदि ) के तेल मे थोड़ी मात्र मे रह जाते है, लगभग 2 – 3%, जिससे रक्तचाप (BP) बढ़ना, आदि बीमारियाँ होती है, तिल, सरसो, मूँगफली, नारियल आदि तेलो मे विद्यमान विटामिन व एंजाइमो के कारण जो विशेष स्वाद व सुगंध होता है वह रिफ़ाइन करने से नष्ट हो जाता है रिफ़ाइन तेलो मे स्वाद सुगंध न होने से मिलावट की आशंका अधिक है

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महाझूठ – सोयाबीन का तेल बहुत गुणकारी है

सत्य – सोयाबीन का तेल पेन्ट और वार्निश मे काम आने वाला तेल है अमेरिकी स्वार्थ के कारण इसका ज़ोर शोर से प्रचार हो रहा है

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महाझूठ – जर्सी गाय

सत्य – जब हम भेंड को भेंस-गाय, गाय को याक-गाय नहीं कहते तो जर्सी को जर्सी-गाय क्यों कहते है ? जर्सी, होलेस्टीन, फ्रीजियन आदि गाय नहीं सदृश्य जानवर है ये जानवर पूतना की तरह विश और नपुंसकता के वाहक है इसी कारण पश्चिम मे ब्लेक-टी, ब्लेक-कॉफी, (दूध रहित कॉफी चाय) का प्रचालन है और दूध को सफ़ेद जहर मे गिना जाने लगा है जबकि गाय तो माता है एक ‘चलता फिरता औषधालय’ और दूध उसका अमृत है
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महाझूठ – वनस्पति गरीबों का घी ।

सत्य – तेल को घी कहकर बेचने से बढ़ा झूठ और क्या हो सकता है ? तेल को हाइड्रोजन और निकल के द्वारा विकृत कर क्या असली घी बनाया जा सकता है ? यह तो रावण के साधू वेष धारण करने जैसा है, गौ हत्या के कारण भारत मे घी की कमी न हो इसलिए नकली घी बनाकर खिलाने की चाले नेहरू के कार्यकाल से चली आ रही है , इस घिनोने षड्यंत्र के तहत भारत मे ऐसे घी बनाने का षड्यंत्र का जमकर प्रयोग हुआ, जिसका पर्दाफाश करने के स्थान पर नेहरू ने इसको संरक्षण दिया, विदेशियों के साथ गौ का मांस चखने वाले को क्या पता गौ का महत्व और ध्यान

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महाझूठ – भारतीय गाये कम दूध देती है, जबकि जर्सी अधिक दूध देती है

सत्य – भारत मे गायों की 30 से भी अधिक नस्ले है, जिनमे अधिकांश अच्छे बैल देने वाली 28 नस्ले है कुछ नस्ले अच्छे बैल और अधिक दूध देने वाली नस्ले है, 6 नस्ले तो अधिक दूध देती है लेकिन जब तुलना की जाती है तब बैल देने वाली नस्लों और जर्सी आदि की तुलना की जाती है इन विदेशी जानवरो के नर खेती के काम के योग्य ही नहीं है ये सिर्फ कटने के लिए ही विकसित हुए है

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महाझूठ – धवल क्रांति के कारण भारत मेन दूध की नदियां बहाने लगी

सत्य – धवल क्रांति की आड़ मे कम दूध देने वाली गाय के नाम पर गौ माता पर भयंकर अत्याचार हुआ, रोगौत्पादक जर्सी आदि जानवरों और भेंसों को बढ़ावा दिया (हमने हमेशा व्यापार मे क्रांति का अर्थ विदेशी क्रांति से ही लिया)

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महाझूठ – हरित क्रांति ने देश को खाद्यान की समस्या हल कर दी

सत्य – हरित क्रांति की आड़ में प्रचलित संकर बीज, खाद्य और कीटनाशकों ने पूरे आहार को विषाक्त कर दिया फलस्वरूप आज एक एक व्यक्ति बीमार और अस्वस्थ है आवश्यकता अंग्रेज़ो द्वारा नष्ट सुजलाम सुफलाम कृषि व्यवस्था को बढ़ावा देने की थी , और आज भूख से कितने मरते है यह बात किसी से छुपी है क्या ? कोंग्रेसी पहले भी झूठ बोलते है और आज भी झूठ का सिलसिला अनवरत जारी है भारत निर्माण खूब अच्छे से हो रहा है

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महाझूठ – टीवी के विज्ञापन

सत्य – टीवी के विज्ञापन मे विज्ञापित वस्तुओं की लागत और बिक्री मूल्य में 12-14 गुने से भी अधिक का अंतर होता है जैसे 80-85 पैसे में बना कोल्ड ड्रिंक 10-12 रु॰ में 1.50 – 2.00 रु॰ में बने टूथपेस्ट 40-45 रु॰ में, 1.00-1.50 रु॰ में बने साबुन 15-20 रुपये में बेचे जाते है
किसी भी सौन्दर्य की क्रीम मे हमेशा ट्राइ करने के लिए क्यूँ कहते है ऐसा क्यूँ नहीं कहते है की यह प्रमाणित है ? फिर भी लोग इसे लगते है !

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महाझूठ – शुद्ध नमक एकदम सफ़ेद होता है

सत्य – सोडियम क्लोराइड का रंग हल्का सफ़ेद होता है, इसलिए शुद्ध नमक की पहचान उसका एकदम सफ़ेद न होना ही है उसे सफ़ेद करने के लिए उसमे मेग्नेशियम क्लोराइड जेसी अशुद्धियाँ मिलाई जाती है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है मेग्नेशियम क्लोराइड अक्सर टीवी के विज्ञापन मे एरियल, टाइड जैसे डिटर्जेंट मे लिखा या दिखाया जाता है , नमक को सफ़ेद रंग से इसलिए करते है क्योंकि हल्का सफ़ेद रंग आज के जमाने मे अशुद्धता और मैल की निशानी है बाजार मे कम बिकता है

जिन्हे अपने भारत के प्राचीन ज्ञान और विज्ञान पर अधिकाधिक भरोसा है वे भारत से प्रेम करते है जिन्हे अमेरिकी यूरोपियन चोरो की तकनीक पर भरोसा है उन्हें कितना भि जगाओ, उन्हें अङ्ग्रेज़ी शिक्षा की ऐसी घुट्टी पिलाई जाती है की भारत के ज्ञान विज्ञान से नफरत है उन्हें वे हर चीज को मेकोले की कसोटी पर देखेंगे उसके आगे सोचेंगे भी ?

पिछली पोस्ट में हमने ऋषियों की परंपरा का उल्लेख करते हुए अर्थ और त्रिदोष का वर्णन किया था लेकिन इस मेकोले की शिक्षा को क्या पता त्रिदोष क्या है ? इस पोस्ट पर 7-9 कमेन्ट उन काले अंग्रेज़ो के थे जो आंठवि कक्षा के फोर्मूले को 11-12 के फोर्मूले से मिलान कर रहे थे और स्वामी रामदेवजी को पाखंडी और धूर्त कह रहे थे, उन्हें वह सब मूल्य और ज्ञान अंधविश्वास लगता है जो प्राचीन गौरव से जुड़ा है ! यह कहते हुए अत्यंत वेदना होती है की भारत मे इसाइवाद ही इंडिया को अधिक बढ़ावा दे रहा है यह पंथ एक धीमा जहर है अधिकतर लोग स्वामी रामदेवजी का समर्थन नहीं करते है उनमे 80% लोग ईसाई होते है, कल ऐसे ही एक मतिभ्रमित पत्रकार (टाइम्स ऑफ इंडिया ) ने बाबा को गौ मांस खाने की सलाह दे डाली ।

अँग्रेजी शिक्षा इसाइयों को ही अधिक रास आती है उनके पुरखो की निशानी जो है, इसलिए वे तिलमिला जाते है भारत के ज्ञान के आगे और छेड़ने लग जाते है मुंह से गंदगी ।
जिन तीन लोगो को बेन किया गया है उन काले अंग्रेज़ो का विवरण नीचे है
ऐसे लोगो की पहचान आप भी करिए, ऐसे इंडिया के अंग्रेज़ बहुत है जो बाबा रामदेव को पाखंडी कहते है क्योंकि वे भारत के लिए लड़ रहे है

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