गायनेकोलोजिस्टों का अज्ञान या व्यापारिक षड्यंत्र ?

गायनेकोलोजिस्टों का अज्ञान :

हमारे यहाँ की अनपढ़ से अनपढ़ महिलाएं भी जानती है की गरम आहार से गर्भपात हो सकता है इसलिए गर्भवती महिलाओं को गुड, गरम मसाला, पपीता, लहसुन, बैंगन, दही आदि का सेवन नहीं करना चाहिए लेकिन जैसे ही कोई गर्भवती स्त्री डॉक्टर (व्यापारी) के पास जाती है वे उसे खून और केल्सियम की कमी बताकर आइरन – केल्शियम देना शुरू कर देते है , आयरन केल्शियम दोनों बहुत गरम होते है इससे गर्भपात का मुंह खुल जाता है है और खून निकालने गिरने लगता है, तब डॉक्टर बेड रेस्ट की सलाह देती है बेड रेस्ट के कारण शरीर मेन सूजन आने लगती है जिससे सामान्य प्रसव मेन दिक्कत होती है और ऑपरेशन की नौबत आती है (अब ऑपरेशन मे डॉक्टर को लूटने का भरपूर समय मिलता है)

दूसरी और आज बच्चे पैदा होते ही पीलिया का शिकार हो रहे है या उनके हट वाल्व मे छेद होता है सामान्य 10-15 वर्ष पित्त विकृत रहने के बाद हार्ट के वाल्व मे छेद होता है या बच्चे ‘औटिस्टिक डिस्लेक्सिक’ हो रहे है या 2-3 वर्ष के होते ई चस्मा लगाने लग गए हो । ये सब गरम औषधियो के सेवन का परिणाम है इन सबसे गर्भाशय को बहुत नुकसान होता है इसी का परिणाम है की आज गर्भाशय की बीमारियो की और उनसे मुक्ति के लिए गर्भाशय को निकलवाने की बाढ़ आ गई है (अब यहाँ भी व्यापार, अंग्रेज़ हर चीज मे व्यापार कराते है और हम उनके बढ़िया ग्राहक)

गायनेकोलोजिस्टों का षड्यंत्र –

एक स्वाभाविक प्रसव में कोई विशेष कमाई नहीं होती लेकिन सिजेरियन डिलिवरी अब आम बात है, मरीज को दर्द और भय दिखाकर कितनी कमाई होती है यह किसी से छुपी नहीं है

ज्योतिष का दुरपयोग : –

दिल्ली, नोएडा, चंडीगड़,जयपुर जैसे शहरो मे ऐसे डॉक्टर होते है जो ज्योतिषी का भी काम करते है वे सिजेरियन डिलिवरी के लिए भय दिखाते है अगर फिर भी मरीज न माने तो उसे ज्योतिष का लालच दिया जाता है कहा जाता है की देखो ! डिलिवरी का दिन बड़ा धुभ है, इस दिन उत्पन्न हुई संतान मे कई दोष होंगे लेकिन उसके चार पाँच दिन पहले बड़ा शुभ दिन है उस दिन होने वाली संतान बड़ी गुनीं होगी”

अब गुणी संतान चाहिए तो करवाओ सिजेरियन ऑपरेशन और फिर निकालो माल !

जब गर्भाधान ही मुहूर्त के अनुसार नहीं होता तो प्रसव के लिए कृत्रिम मुहूर्त रचने से क्या लाभ – सिजेरियन डिलिवरी के लिए सीजर (केंची) का उपयोग होता है केंची लोहे की होती है और लोहे मे शनि देंव का वास होता है । अभी जो बच्चा जन्म ही नहीं है उस पर जब शनि की दृष्ठि पड़ेगी तो बच्चे का भविष्य क्या होगा ?

…..खैर इंडिया के लोगो का शनि से क्या मतलब ?

आइरन केल्शियम का ढोंग :

गायनेकोलोजिस्ट कहती है की आइरन केल्शियम की कमी दूर करेंगे नहीं तो बहुत सी समस्याएँ पैदा हो जाएंगी । बात बिलकुल सत्या है लेकिन यदि आपको वास्तव मेन यह चिंता है तो एशोसिएशन यह प्रचार करता क्यूँ फिरता है की “स्त्रियाँ गर्भ धरण करें जब उनके शरीर मे आइरन केल्शियम की कमी न हो ?” गर्भधारण करने के बाद ही आप क्यूँ जागती हो जबकि आप जानती हो की गर्भवती के लिए आइरन केल्शियम हानिकारक है सीसी स्थिति ही क्यों आने देती है जहां एक ओर कूआ और दूसरी तरफ खाई हो ?

उपाय : जब शरीर मे आइरन केल्शियम की कमी हो तो शरीर मे वात्त पित्त को नियंत्रित करें सूखेपन (वात) के कारण शरीर आहार से केल्शियम को अवशोषित नहीं कर पाता जबर्दस्ती केल्शियम का सेवन कराने से यह किडनी या पित्ताशय (गॉल – ब्लेंडर) में पथरी, आँख में मोतियाबिंद, हड्डियों की विकृति या हृदय की धड़कन को तेज करने का काम कर सकता है ।

दूध मे गाय का घी डालकर पीने से दूध का केल्शियम सुपाच्य हो जाता है

चुने के पानी * के सेवन से यह समस्या दूर हो जाती है

गाय का दूध लोहे की कढ़ाई मे गरम करके पीने से भी लोह तत्व बहुत मात्र मे उपलब्ध हो जाता है

अनार के रस से प्रचुर लोह तत्व मिलता है

*विधि – पनवालों के पास मिलने वाली चुने की ट्यूब को एक लीटर पनि मे डालकर अच्छी तरह हिलाकर मिलाये एक घंटे बाद मे उस जल को निथारकर (छानना नहीं है) काँच की बोतल मे रख ले शेष चुना फेंक दे, दिन मे तीन बार दो दो चम्मच दूध, रस, दाल, आदि मे मिलकर सेवन करें !

सांवधान – दूध गाय का ही होना चाहिए, रात को अनार दानों को इमाम दस्ते में कूटकर या लोहे की कढ़ाई में मसलकर कपड़े में ढककर रख दें सुबह इसे छानकर पी लें

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